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ऊदा देवी 1857 के संग्राम की पासी वीरांगना (1830-1857)

उदा देवी पासी

जन्म - तिथि: 30 जून 1830
मृत्यु - तिथि: 16 नवंबर 1857

मृत्यु - स्थान: सिकंदर बाग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

आंदोलन: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम इस लड़ाई के दौरान ऊदा देवी पासी ने पुरुषों के वस्त्र धारण कर स्वयं को एक पुरुष के रूप में तैयार किया था। लड़ाई के समय वो अपने साथ एक बंदूक और कुछ गोला बारूद लेकर एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गयी थीं। उन्होने हमलावर ब्रिटिश सैनिकों को सिकंदर बाग़ में तब तक प्रवेश नहीं करने दिया था जब तक कि उनका गोला बारूद खत्म नहीं हो गया।

इतिहास

सिकंदर बाग, जहां उदा देवी पासी ने 32 ब्रिटिश सैनिकों को मार गिराया और वीरगति को प्राप्त हुईं
ऊदा देवी पासी के पति श्री मक्का पासी नवाब वाजिद अली शाह की सेना के एक सैनिक थे। वाजिद अली शाह दौरे वली अहदी में परीख़ाना की स्थापना के कारण लगातार विवाद का कारण बने रहे। फरवरी, 1847 में नवाब बनने के बाद अपनी संगीत प्रियता और भोग-विलास आदि के कारण बार-बार ब्रिटिश रेजीडेंट द्वारा चेताये जाते रहे। उन्होंने बड़ी मात्रा में अपनी सेना में सैनिकों की भर्ती की जिसमें लखनऊ के सभी वर्गों के गरीब लोगों को नौकरी पाने का अच्छा अवसर मिला। ऊदा देवी पासी के पति भी काफी साहसी व पराक्रमी थे, इनकी सेना में भर्ती हुए।

वाजिद अली शाह ने इमारतों, बाग़ों, संगीत, नृत्य व अन्य कला माध्यमों की तरह अपनी सेना को भी बहुरंगी विविधता तथा आकर्षक वैभव दिया। उन्होंने अपनी पलटनों को तिरछा रिसाला, गुलाबी, दाऊदी, अब्बासी, जाफरी जैसे फूलों के नाम दिये और फूलों के रंग के अनुरूप ही उस पल्टन की वर्दी का रंग निर्धारित किया। परी से महल बनी उनकी मुंहलगी बेगम सिकन्दर महल को ख़ातून दस्ते का रिसालदार बनाया गया। स्पष्ट है वाजिद अली शाह ने अपनी कुछ बेगमों को सैनिक योग्यता भी दिलायी थी। उन्होंने बली अहदी के समय में अपने तथा परियों की रक्षा के उद्देश्य से तीस फुर्तीली स्त्रियों का एक सुरक्षा दस्ता भी बनाया था। जिसे अपेक्षानुरूप सैनिक प्रशिक्षण भी दिया गया। संभव है ऊदा देवी पहले इसी दस्ते की सदस्य रही हों क्योंकि बादशाह बनने के बाद नवाब ने इस दस्ते को भंग करके बाकायदा स्त्री पलटन खड़ी की थी। इस पलटन की वर्दी काली रखी गयी थी।[1]

ऊदा देवी, १६ नवम्बर १८५७ को 36 अंग्रेज़ सैनिकों को मौत के घाट उतारकर वीरगति को प्राप्त हुई थीं।[2][3] ब्रिटिश सैनिकों ने उन्हें जब वो पेड़ से उतर रही थीं तब गोली मार दी थी। उसके बाद जब ब्रिटिश लोगों ने जब बाग़ में प्रवेश किया, तो उन्होने ऊदा देवी पासी का पूरा शरीर गोलियों से छलनी कर दिया। इस लड़ाई का स्मरण कराती ऊदा देवी पासी की एक मूर्ति सिकन्दर बाग़ परिसर में कुछ ही वर्ष पूर्व स्थापित की गयी है।

सार्जेण्ट फ़ॉर्ब्स मिशेल ने सिकंदर बाग के उद्यान में स्थित पीपल के एक बड़े पेड़ की ऊपरी शाखा पर बैठी एक ऐसी स्त्री का विशेष उल्लेख किया है, जिसने अंग्रेजी सेना के लगभग बत्तीस सिपाही और अफसर मारे थे। लंदन टाइम्स के संवाददाता विलियम हावर्ड रसेल ने लड़ाई के समाचारों का जो डिस्पैच लंदन भेजा उसमें पुरुष वेशभूषा में एक स्त्री द्वारा पीपल के पेड़ से फायरिंग करके तथा अंग्रेजी सेना को भारी क्षति पहुँचाने का उल्लेख प्रमुखता से किया। संभवतः लंदन टाइम्स में छपी खबरों के आधार पर ही कार्ल मार्क्स ने भी अपनी टिप्पणी में इस घटना को समुचित स्थान दिया।[1] इन्हें इसकी प्रेरणा अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पति मक्का पासी से प्राप्त हुई थी। 10 जून 1857 को लखनऊ के चिनहट कस्बे के निकट इस्माईलगंज में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व में ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौज के साथ मौलवी अहमद उल्लाह शाह की अगुवाई में संगठित, विद्रोही सेना की ऐतिहासिक लड़ाई में मक्का पासी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके प्रतिशोध स्वरूप उन्होंने कानपुर से आयी काल्विन कैम्बेल सेना के 36 सिपाहियों को मृत्युलोक पहुँचाया। इस लड़ाई में वे खुद भी वीरगति को प्राप्त हुईं। कहा जाता है इस स्तब्ध कर देने वाली वीरता से अभिभूत होकर काल्विन कैम्बेल ने हैट उतारकर शहीद ऊदा देवी को श्रद्धांजलि दी।

सन्दर्भ
साभार विकिपीडिया।
उदा देवी:२[मृत कड़ियाँ]। बिग अड्डा। २४ अक्टूबर २००९। शकील सिद्दीकी
वीरांगना ऊदा देवी पासी को याद करने पर भी माया सरकार का प्रतिबंध Archived 2010-11-28 at the वेबैक मशीन। स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम।
बलिदान दिवस पर शिद्दत से याद की गई वीरांगना ऊदादेवी[मृत कड़ियाँ]। याहू जागरण। १६ नवम्बर २००९

About virangana Uda Devi smarak Sansthan

वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान समाज को समर्पित पंजीकृत संगठन है। पासी रतन राम लखन द्वारा सन 1993 में वीरांगना उदा देवी स्मारक संस्थान की स्थापना की गई। संस्थापक के रूप में राम लखन जी का संपूर्ण जीवन शोषित, वंचितों, महिलाओं गरीब बच्चों, बुजुर्गों की सेवा में समर्पित हुआ। पिछले लगभग 23 वर्षों से संस्थान निरंतर सर्वधर्म समाज सेवा में समर्पित है।
सर्वप्रथम 1990 में राम लखन जी द्वारा उत्तर प्रदेश के पासी जागृति मंडल के माध्यम से सामाजिक सेवा प्रारंभ की
वर्ष 1994 6 अप्रैल को राजा बिजली फैंसी किले पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव द्वारा केले को फांसी समाज को सौंपने के लिए घोषणा करवाया तथा उसके रखरखाव के लिए 15 लाख रुपया दिलवाया जो आज भी महाराजा बिजली पासी स्मारक सांस्कृतिक ट्रस्ट में जमा है।
2. वर्ष 1994 में पासी समाज का प्रथम प्रश्न का गठन हुआ जिसके महामंत्री डॉ राम लखन को बनाया गया
3. वर्ष 1995 में वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान का महामंत्री बनाया गया तथा बाद में सर्वसम्मति से अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
4. वर्ष 1995 में जब अंसल बिल्डर द्वारा राजा बिजली पासी के लिए घोषित किया जा रहा था तब श्री राम लखन ने अपना रिवाल्वर चलकर किले को बचाया था।
5. वर्ष 1997 में अज्ञात वीरांगना का पत्थर हवा कर वीरांगना ऊदा देवी पासी करके श्री राम लखन ने तत्कालीन रेल मंत्री श्री पासवान जी से लोकार्पण करवाया था तथा श्री राम विलास पासवान द्वारा श्री राम लखन को पासी रतन की उपाधि से अलंकृत करते हुए उन्हें सम्मानित किया था
6. वर्ष 1998 में वीरांगना उदय देवी स्मारक संस्थान के सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में श्री राम लखन जी का चुनाव हुआ
7. वर्ष 1998 में जब मुख्यमंत्री मायावती राजा बिजली पासी किले की बाउंड्री को बनवाने के लिए जब प्रस्ताव मांगा डॉक्टर राम लखन एक नक्शा बनाकर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री श्री आर के चौधरी को दिया था
8. वर्ष 1998 99 में श्री राम लखन स्टांप एवं निबंधन ऑफिसर्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष तथा बाद में अध्यक्ष पद पर कार्य किया
9. 25 फरवरी 2000 को राजा बिजली पासी किले पर मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह को श्री राम लखन ने बुलाकर किला को पर्यटन स्थल बनाने के लिए 25 लाख तथा महाराजा बिजली पसी कॉलेज के निर्माण हेतु एक करोड़ 25 लाख तथा पुस्तकालय हेतु 10 लख रुपए की घोषणा करवाई और असली मूर्ति राजा बिजली पासी किले परिसर में लगवाने हेतु शिलान्यास करवाया
10. वर्ष 2000 में 16 नवंबर को सिकंदराबाद चौराहे पर आयोजित वीरांगना ऊदा देवी शहीद दिवस पर राजा बिजली पासी पर तथा वीरांगना ऊदा देवी पर श्री राम लखन के अथक प्रयास से तत्कालीन संचार मंत्री श्री राम विलास पासवान द्वारा डाक टिकट जारी करवा के पार्टी समाज का सम्मान स्वाभिमान विश्व स्तर तक पहुंचा जिसके कारण आज देश का पासी समाज श्री राम लखन को अपना मसीहा मानता है
11. वर्ष 2004 में 10 लड़कियों तथा वर्ष 2005 में 125 लड़कियों तथा वर्ष 2008 में 71 लड़कियों का सामूहिक विवाह श्री राम लखन ने अपने स्वयं के निजी खर्चे से करवाया जो एक देश में रिकॉर्ड है वर्ष 2013 तक 4000 सर्वजाती की निर्धन कन्याओं का निशुल्क सामूहिक विवाह करवाया
12. वर्ष 2003 में महू छावनी मध्य प्रदेश में वीरांगना ऊदा देवी की मूर्ति स्थापना श्री राम लखन ने करके इसका लोकार्पण किया

13. वर्ष 2002 में राजा कल्याण मल की मूर्ति कल्ली पश्चिम लखनऊ में लगवाई तथा वर्ष 2001 में बाराबंकी जनपद में राजा गंगा बक्श रावत की मूर्ति पासी रतन डॉक्टर राम लखन ने लगवाई
14. वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान का गठन 17 राज्यों में श्री राम लखन जी ने किया है
15. जून 2006 में राजा चिता पासी की भूमि सीतापुर के वीडियो को जिलाधिकारी श्री राकेश गोयल से बातचीत करके श्री राम लखन द्वारा रजिस्ट्री कराई गई इस अवसर पर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष श्री भवन नाथ पासवान भी मौजूद थे 75000 का स्टांप खर्च स्वयं पासी रन ने बहन किया

हमारा दृष्टिकोण

हमारा मिशन
वीरांगना ऊदा देवी के साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर कार्य करना हमारा संकल्प है।

हम शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा जरूरतमंद लोगों के सहयोग के माध्यम से एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करते हैं, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, अवसर और आगे बढ़ने का समान अधिकार प्राप्त हो।

हमारी दृष्टि
हम एक ऐसे सशक्त, शिक्षित और जागरूक समाज की कल्पना करते हैं, जहाँ हर व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और प्रत्येक महिला एवं युवा को अपने सपनों को साकार करने के लिए समान अवसर प्राप्त हों।

हमारा उद्देश्य वीरांगना ऊदा देवी के अदम्य साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणा को जन-जन तक पहुँचाना तथा शिक्षा, सेवा और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

हमारे प्रमुख कार्य एवं उद्देश्य

हमारी उपलब्धियाँ
तीन दशकों की समाज सेवा, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की हमारी प्रेरणादायक उपलब्धियाँ।

संस्थान की स्थापना
वर्ष 0
राज्यों में संगठन का विस्तार
0
वर्षों का सामाजिक अनुभव
0 +
सामूहिक विवाह सम्पन्न
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