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पासी रत्न राम लखन जी की प्रथम पुण्यतिथि पर वीरसिंहपुर, प्रतापगढ़ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
23 अगस्त 2026 | वीरसिंहपुर, प्रतापगढ़
23 अगस्त 2026 को वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान के संस्थापक, पासी रत्न एवं पासी समाज के राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता श्रद्धेय राम लखन जी की प्रथम पुण्यतिथि उनके पैतृक ग्राम वीरसिंहपुर, जनपद प्रतापगढ़ में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर श्रद्धेय राम लखन जी को श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का आयोजन उनकी पुत्री आदरणीया बहन अलका राजवंशी जी के संयोजन में किया गया, जिसमें बहुजन भोज एवं वस्त्र वितरण कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में जनपद बाराबंकी के वरिष्ठ साथियों सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर श्रद्धेय राम लखन जी के दामाद श्री आलोक राजवंशी, वित्त नियंत्रक, उत्तर प्रदेश शासन; परमपूज्य बाबा बैजनाथ रावत; संगठन के बाराबंकी जिला अध्यक्ष अनिल सिंह रावत; वरिष्ठ साथी राम यश विक्रम; डॉ. वासुदेव विक्रम; डॉ. प्रमोद वर्मा; जिला महासचिव अमरीश रावत; विनोद रावत सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
श्रद्धेय राम लखन जी का सामाजिक एवं ऐतिहासिक योगदान
वक्ताओं ने श्रद्धेय राम लखन जी के सामाजिक एवं ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वीरांगना ऊदा देवी के इतिहास और उनकी वीरगाथा को जन-जन तक पहुँचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उनके प्रयासों से सिकन्दर बाग चौराहे पर स्थापित वीरांगना ऊदा देवी की प्रतिमा को उनकी पहचान एवं इतिहास से जोड़ा गया। वीर शिरोमणि महाराजा बिजली पासी के किले के संरक्षण, सौन्दर्यीकरण एवं भव्य द्वार के निर्माण तथा डाक टिकट जारी कराने के प्रयासों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अपने जीवनकाल में उन्होंने देश के विभिन्न प्रदेशों में वीरांगना ऊदा देवी की प्रतिमाओं की स्थापना एवं उनके इतिहास के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य किया। सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उनके द्वारा लगभग 4000 निर्धन कन्याओं के विवाह महाराजा बिजली पासी के किले पर करवाए जाने का उल्लेख भी कार्यक्रम में किया गया।
विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने श्रद्धेय राम लखन जी के सामाजिक कार्यों और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
उपस्थित साथियों ने कहा कि वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान के माध्यम से समाज की ऐतिहासिक विरासत, वीरांगना ऊदा देवी एवं अन्य महान विभूतियों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
श्रद्धेय राम लखन जी की प्रथम पुण्यतिथि पर संस्थान परिवार की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत्-शत् नमन।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे सामाजिक कार्यकर्ता
कार्यक्रम में जनपद बाराबंकी के वरिष्ठ साथियों सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर श्रद्धेय राम लखन जी के दामाद श्री आलोक राजवंशी, वित्त नियंत्रक, उत्तर प्रदेश शासन, परमपूज्य बाबा बैजनाथ रावत, संगठन के बाराबंकी जिला अध्यक्ष अनिल सिंह रावत, वरिष्ठ साथी राम यश विक्रम, डॉ. वासुदेव विक्रम, डॉ. प्रमोद वर्मा, जिला महासचिव अमरीश रावत, विनोद रावत आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
श्रद्धेय राम लखन जी का सामाजिक एवं ऐतिहासिक योगदान
श्रद्धेय राम लखन जी ने सामाजिक जागरूकता, ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और वीरांगना ऊदा देवी के इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके प्रयासों से समाज में स्वाभिमान और अपनी ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूकता को नई दिशा मिली।
सिकन्दरबाग चौराहे पर स्थापित वीरांगना ऊदा देवी की प्रतिमा को उनकी पहचान एवं इतिहास से जोड़ने, वीर शिरोमणि महाराजा बिजली पासी के किले के संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं भव्य द्वार के निर्माण तथा वीरांगना ऊदा देवी के सम्मान में डाक टिकट जारी कराने के प्रयासों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अपने जीवनकाल में उन्होंने देश के विभिन्न प्रदेशों में वीरांगना ऊदा देवी की प्रतिमाओं की स्थापना एवं उनके इतिहास के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य किया। सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। कार्यक्रम में बताया गया कि उन्होंने लगभग 4,000 निर्धन कन्याओं के विवाह महाराजा बिजली पासी के किले पर करवाने में सहयोग किया।
विशेष उल्लेखनीय सामाजिक योगदान
लगभग 4,000 निर्धन कन्याओं के विवाह में सहयोग
सामाजिक सेवा और जनकल्याण के प्रति श्रद्धेय राम लखन जी की प्रतिबद्धता का यह एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने श्रद्धेय राम लखन जी के सामाजिक कार्यों और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उपस्थित साथियों ने कहा कि वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान के माध्यम से समाज की ऐतिहासिक विरासत, वीरांगना ऊदा देवी एवं अन्य महान विभूतियों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
उपस्थित सभी साथियों ने श्रद्धेय राम लखन जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए उनकी विरासत को सुरक्षित रखने और उनके सपनों को साकार करने के लिए पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन
श्रद्धेय राम लखन जी की प्रथम पुण्यतिथि पर वीरांगना ऊदा देवी स्मारक संस्थान परिवार की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन। उनके सामाजिक योगदान, संघर्ष और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे।
श्रद्धांजलि गीत
पासी कुल के नायक जय हे, रामलखन भ्राता
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।
बरछी और कृपाण अस्मिता की कहते गाथा।
अवध प्रांत पर रहा राज्य, इतिहास ये बतलाता।।
शताधिक्य भवनों के ये अवशेष बताते हैं।
पासी कुल की गौरव गाथा कहते जाते हैं।।
रंग गुलाबी स्वाभिमान का परिचय बतलाता।
पासी कुल के नायक जय हे, रामलखन भ्राता।।
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।
उदा देवी की स्मृति में जो तुमने कार्य किया।
डाक टिकट बिजली पासी पर यह सत्कार्य किया।।
द्वार बन रहे कहीं, मूर्तियां स्थापित होती हैं।
उदा, बिजली, लाखन, बीरा की चर्चा होती है।।
शौर्य तुम्हारा पासी ध्वज बन गगन में फहराता।
पासी कुल के नायक जय हे, रामलखन भ्राता।।
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।
पढ़ा-लिखा नेतृत्व, पढ़ाई की राहें गढ़ती थी।।
जिन्हें न लिखना पढ़ना आता, उनकी रचनाएं छपती थीं।।
स्वाभिमान से जीने का था जज्बा लहराता।
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।
नेता में हम जिस दिन छिद्रान्वेषण करते हैं।
उनके सत्कर्मों के बदले कर्मियों पर चर्चा करते हैं।।
सामाजिक परिवर्तन आंखों से है ओझल हो जाता।।
पासी कुल के नायक जय हे, रामलखन भ्राता।
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।
चले गए तुम छोड़ कई सपनों की तैयारी।
जिन्हें बनाया नेता, वह सब निकले व्यापारी।।
उदा जी को बेच रहे हैं जैसे गौ माता।।
पासी कुल के नायक जय हे, रामलखन भ्राता।
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।
उदादेवी जी की स्मृति में जब से संस्थान बना।
स्वाभिमान से पासियों का सीना हरदम रहा तना।।
सारे नेता अब सत्ता संग मौजें काट रहे हैं।
या यूं कह लें सत्ता के ही तलवे चाट रहे हैं।।
याद तुम्हारी आती तो मन यूं ही अकुलाता।
पासी कुल के नायक जय हे, रामलखन भ्राता।
आज तुम्हारे श्रम संयम का प्रतिफल लहराता।।






